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क्या कुटकी बुखार मैनेजमेंट में मदद कर सकती है?

  हाँ, आयुर्वेद में कुटकी (Picrorhiza kurroa) को बुखार (ज्वर) के प्रबंधन के लिए एक शक्तिशाली जड़ी–बूटी माना गया है। यह अपने कड़वे स्वाद और ‘शीत‘ (ठंडा) स्वभाव के कारण शरीर की बढ़ी हुई गर्मी को कम करने में मदद करती है।   क्या कुटकी बुखार को कम करने में वाकई प्रभावी है? जी हाँ, कुटकी में ‘एंटी–पायरेटिक‘ (Jwarghna) गुण होते हैं, जो प्राकृतिक रूप से शरीर के तापमान को कम करने में मदद करते हैं। यह विशेष रूप से उन बुखारों में फायदेमंद है जो लिवर की गड़बड़ी या पित्त दोष के असंतुलन के कारण होते हैं। यह बुखार में कैसे काम करती है? कुटकी मुख्य रूप से दो तरीकों से काम करती है: · लिवर डिटॉक्स: यह लिवर से टॉक्सिन्स (आम) को बाहर निकालती है, जिससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। · पित्त संतुलन: आयुर्वेद के अनुसार, बुखार अक्सर शरीर में ‘पित्त‘ बढ़ने से होता है। कुटकी पित्त को शांत कर शरीर को ठंडक पहुंचाती है। किन प्रकार के बुखार में कुटकी सबसे ज्यादा लाभकारी है? कुटकी का उपयोग अक्सर निम्नलिखित स्थितियों में किया जाता है: · पुराना बुखार (Chronic Fever): जो लंबे समय से बना हुआ हो। · मलेरिया और वायरल बुखार: इसके एंटी–माइक्रोबियल गुण संक्रमण के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। · लिवर संबंधी बुखार: पीलिया (Jaundice) के साथ होने वाले बुखार में यह रामबाण मानी जाती है। बुखार के लिए कुटकी का सेवन कैसे करें? आमतौर पर इसे चूर्ण या काढ़े के रूप में लिया जाता है: · कुटकी चूर्ण: 500mg से 1 ग्राम कुटकी चूर्ण को शहद या गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है। · मिश्रण: अक्सर इसे चिरायता या गिलोय के साथ मिलाकर लिया जाता है ताकि इसकी प्रभावशीलता बढ़ सके। क्या इसके कोई दुष्प्रभाव (Side Effects) भी हैं? यदि अधिक मात्रा में लिया जाए, तो कुटकी से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं: ·  दस्त (Diarrhea) या पेट में मरोड़। ·  उल्टी या जी मिचलाना। ·  ब्लड शुगर का बहुत कम होना (यदि आप पहले से शुगर की दवा ले रहे हैं)। For more information visit us ; Website: https://www.healthyvedics.com/…

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